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मई, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

एक तोते की दर्द भरी कहानी

  बहुत समय पहले की बात है एक राजा था और उसके तीन बेटे थे । राजा बहुत ही बूढ़ा हो गया था और वह यही चाह रहा था की कोई उसके गददी को सभाल ले । एक दिन राजा ने अपने तीनो बेटो को बुलाकर बोला आज मैं तुम लोगो को एक काम के लिए बुलाया हु , सब लोगो को अपना काम बहुत ही ईमानदारी से करना होगा । राजा के तीनो बेटे संकट में पड गए की अब क्या होगा मेरा , लेकिन जैसे ही राजा ने बोलना सुरु किया सब लोग चुप हो गए । राजा ने अपने तीनो बेटो का इम्तहान लेना चाहता था और उसने अपने पहले बेटे से पूछा अगर आप को किसी अपराधी को सजा देने को कहा जाये तो आप क्या दोगे। पहले ने बोला मैं तो जेल में दाल दूंगा , फिर दूसरे ने बोला मैं तो फांसी दे दूंगा । फिर क्या था राजा ने अपने तीसरे बेटे से भी यही पूछा । तीसरा बीटा बहुत ही चालक था और बोला पिता जी मैं आप को कुछ बताने से पहले एक कहानी सुनाना चाहता हूँ । राजा ने कहा तो आप सुरु हो जावो । तीसरे लड़के ने बोला एक बहुत ही अमीर राजा था और उसने एक तोता पाल रखा था और वह तोता से बहुत प्यार करता था । एक पल भी उसके बिना जी नहीं पता था । एक दिन की बात है तोता बहुत ही जिद करने लगा और बोला...

कैसे एक दृष्टहीन श्रीकांत बोला जी ने खड़ी की 50 करोड़ की कंपनी – Srikanth Bolla Story In Hindi

  दोस्तों यह कहानी पढ़कर आप की आँखों मे अंशु आ जायेगा | हम बात कर रहे है श्रीकांत बोला की जो की जन्म से ही अंधे है , उनके जन्म लेते ही सारे गावों वालों ने बोला यह बिना आँख का लड़का है जो बुढ़ापे में अपने माँ – बाप की परेसानी बन जायेगा | श्रीकांत बोला का जन्म आंध्र प्रदेश के एक छोटे से कसबे में हुवा था | वक्त बीतता चला गया और यह बालक बड़ा होने लगा , एक दिन श्रीकांत के पिता जी ने उनका एडमिशन अपने गांवों के प्राइमरी स्कूल मे करा दिया , लेकिन देख न पाने की वजह से श्रीकांत स्कूल मे सही से पढ़ नहीं पाते थे | जब श्रीकांत थोरे और बड़े हो गए तो उनके पिता जी उनको अपने साथ खेतो मे लेकर जाने लगे , लेकिन वहाँ भी वह कुछ नहीं कर पाते थे , क्युकी उनको दिखाई नहीं दे रहा था | उनके पिता ने सोचा हो सकता है यह पढ़ाई मे कुछ अच्छा करे , उन्होंने श्रीकांत का एडमिशन नेत्रहीन स्कूल मे कराया | यहाँ पर इस बालक का मन पढ़ाई मे लगने लगा और वह अपने क्लास का टोपर बन गया | यहाँ पर पढ़ाई करते हुए श्रीकांत को अब्दुल कलाम जी के साथ काम करने का भी मौका मिला | अंधे होने की वजह से इंटरमीडिएट में उनको साइंस सब्जेक्ट नहीं मिल रहा थ...

परिश्रम का फल – जार्ज स्टीफेंस की कहानी

एक बाजार मे दो भाई बहन घूमने निकले | बहन को दूकान मे टंगी एक टोपी बहुत पसंद आयी |भाई ने टोपी की कीमत पूछी तो उदास हो गया , क्युकी उसके पास इतने पैसे नहीं थे | फिर भी वह टोपी अपनी प्यारी बहन के लिए खरीदना चाह रहा था |इसकी कीमत कैसे चुकाई जाई ये सोच ही रहा था की अचानक एक साहब जी चिल्लाते हुए दौर rahe थे | पकड़ो – पकड़ो मेरा घोडा  बेकाबू होकर दौर रहा है जो इसको पकड़ेगा उसको मे इनाम दूंगा | उस लड़के ने एक बार अपनी बहन पर नजर डाली , जो अभी भी उस टोपी को निहार रही थी | उस लड़के के ने साहस दिखाया और अपनी बहन को वही कुछ देर खडे होने के लिए बोला और तुरंत उस घोड़े की तरफ दौडने लगा | दौडते – दौडते वह हाफने लगा लेकिन घोडा रुकने का नाम नहीं ले रहा था | बहन और टोपी लड़के की आंखों मे घूम रहा था , समूचा जोर लगाकर लड़के ने घोड़े की लगाम पकड़ ली | उस साहब ने अपने कोट से पैसे निकाले और लड़के को दे दिया लेकिन लड़के ने बस टोपी का पैसा लिया और उनको वापिस कर दिया | यह देख उस आदमी को बहुत ही अच्छा लगा और उस ने उस लड़के को सबासी दी | बाद मे चल कर इस लड़के ने रेल के इंजन का आविष्कार किया और जार्ज स्टीफेंस नाम से ...

मायका और ससुराल : एक औरत की दर्द भरी कहानी

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ससुराल में वो पहली सुबह आज भी याद है। कितना हड़बड़ा के उठी थी, ये सोचते हुए कि देर हो गयी है और सब ना जाने क्या सोचेंगे ? एक रात ही तो नए घर में काटी है और इतना बदलाव, जैसे आकाश में उड़ती चिड़िया को, किसी ने सोने के मोतियों का लालच देकर, पिंजरे में बंद कर दिया हो। शुरू के कुछ दिन तो यूँ ही गुजर गए। हम घूमने बाहर चले गए। जब वापस आए, तो सासू माँ की आंखों में खुशी तो थी, लेकिन बस अपने बेटे के लिए ही दिखी मुझे। सोचा, शायद नया नया रिश्ता है, एक दूसरे को समझते देर  लगेगी। लेकिन समय ने जल्दी ही एहसास करा दिया कि मैं यहाँ बहु हूँ। जैसे चाहूं वैसे नही रह सकती। *कुछ कायदा, मर्यादा हैं, जिनका पालन मुझे करना होगा। धीरे धीरे बात करना, धीरे से हँसना, सबके खाने के बाद खाना, ये सब आदतें, जैसे अपने आप ही आ गयीं*। घर में माँ से भी कभी कभी ही बात होती थी। धीरे धीरे पीहर की याद सताने लगी। ससुराल में पूछा, तो कहा गया — *अभी नही, कुछ दिन बाद*। जिस पति ने कुछ दिन पहले ही मेरे माता पिता से, ये कहा था कि *पास ही तो है, कभी भी आ जायेगी, उनके भी सुर बदले हुए थे*। अब धीरे धीरे समझ आ रहा था, कि शादी कोई खेल...